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परिमार्जन प्लस बिहार: जमाबंदी में ऑनलाइन सुधार कैसे कराएं
By Pankaj Kumar Bihar Bhumi November 05, 2026 1 min read 4 views Updated: November 05, 2026

परिमार्जन प्लस बिहार: जमाबंदी में ऑनलाइन सुधार कैसे कराएं

जमाबंदी में नाम की स्पेलिंग गलत हो, खाता या खेसरा नंबर गलत दर्ज हो, रकबा या लगान का विवरण गलत हो, तो उसे ऑनलाइन सुधारने का रास्ता परिमार्जन प्लस है। परिमार्जन प्लस बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का पोर्टल है। यह डिजिटल जमाबंदी (रजिस्टर-2) में हुई गलतियों को सुधारने के लिए बना है। बिहार भूमि पोर्टल से परिमार्जन प्लस पर जाकर सही सुधार सेवा चुनें, जमीन का विवरण भरें, जरूरी कागज अपलोड करें और आवेदन जमा करें। इसके बाद आवेदन संख्या से स्थिति भी ऑनलाइन देखी जा सकती है।

🧭 Table of Contents: इस लेख में क्या-क्या है

  1. परिमार्जन प्लस क्या है
  2. किन गलतियों का सुधार होता है
  3. किन कामों के लिए परिमार्जन प्लस नहीं है
  4. सुधार के लिए कौन से कागज चाहिए
  5. ऑनलाइन आवेदन के चरण
  6. सुधार में कितना समय लगता है
  7. आवेदन की स्थिति कैसे देखें
  8. Important Links
  9. इससे जुड़े जरूरी लेख
  10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  11. ज़रूरी सूचना (Disclaimer)

📘 परिमार्जन प्लस: एक नजर में (Overview)

बात जानकारी
सेवा का नाम परिमार्जन प्लस (जमाबंदी सुधार)
विभाग राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार
पोर्टल parimarjanplus.bihar.gov.in (बिहार भूमि पोर्टल से भी पहुँच)
किसका सुधार होता है डिजिटल जमाबंदी में दर्ज गलती का
क्या-क्या सुधर सकता है रैयत का नाम, खाता, खेसरा, रकबा, लगान का विवरण
ध्यान रखने वाली बात इससे जमीन का मालिक नहीं बदला जाता, मालिक बदलना दाखिल-खारिज से होता है

📜 परिमार्जन प्लस क्या है

  • परिमार्जन प्लस डिजिटल जमाबंदी में गलत दर्ज जानकारी को सुधारने का ऑनलाइन माध्यम है।
  • जमाबंदी वह सरकारी रिकॉर्ड है जिसमें रैयत (जमीन के दर्ज मालिक) का नाम, खाता संख्या, खेसरा (प्लॉट) संख्या, रकबा (क्षेत्रफल) और लगान (वार्षिक कर) दर्ज होता है।
  • पहले परिमार्जन पोर्टल शुरू हुआ था। अब उसी काम के लिए परिमार्जन प्लस पोर्टल है।
  • अंचल अधिकारी (Circle Officer) जमाबंदी के आंकड़ों के कानूनी संरक्षक होते हैं। उन्हीं के माध्यम से सुधार के अनुरोध की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
  • आवेदन की स्थिति की जानकारी SMS और ईमेल से भी मिलती है।

📝 किन गलतियों का सुधार होता है

  • रैयत के नाम या पते में गलती हो।
  • खाता, खेसरा, चौहद्दी (प्लॉट की चारों सीमा) या रकबा गलत दर्ज हो।
  • लगान से जुड़े विवरण में गलती हो।
  • क्रेता, विक्रेता, जमाबंदी रैयत या खतियानी रैयत के विवरण में गलती हो।
  • ऑनलाइन दाखिल-खारिज के बाद बनी जमाबंदी में सुधार की जरूरत हो।
  • कंप्यूटरीकरण के समय कोई जमाबंदी डिजिटल होने से छूट गई हो, तो उसके डिजिटलीकरण का अनुरोध भी इसी माध्यम से होता है। इसके लिए जमाबंदी का सबूत चाहिए होता है। सबूत न हो, तो मालिकाना हक का सबूत दिया जा सकता है।

⚠️ किन कामों के लिए परिमार्जन प्लस नहीं है

  • जमीन बेचने या उत्तराधिकार के बाद नए मालिक का नाम दर्ज करना परिमार्जन का काम नहीं है। यह काम दाखिल-खारिज (Mutation) से होता है।
  • परिमार्जन से नया मालिकाना हक नहीं बनता है। यह सिर्फ दर्ज गलती को ठीक करता है।
  • एक अपवाद ध्यान रखें। ऑनलाइन दाखिल-खारिज के बाद बनी जमाबंदी में अगर खाता, खेसरा या रकबा की गलती हो, तो वह परिमार्जन पोर्टल से नहीं सुधरती है। ऐसे मामले में DCLR (उप समाहर्ता, भूमि सुधार) के सामने अपील करनी होती है। DCLR के आदेश के बाद ही सुधार वाली दाखिल-खारिज होती है।

📎 सुधार के लिए कौन से कागज चाहिए

हर सुधार सेवा के लिए कागजों की सूची पोर्टल पर ही दिखाई जाती है। वही सूची अंतिम मानी जाएगी। नाम या पते के सुधार के लिए आमतौर पर ये कागज माँगे जाते हैं:

  • तय प्रारूप में आवेदन।
  • दाखिल-खारिज के मामले के आदेश की स्व-सत्यापित प्रति।
  • सुधार पर्ची (Correction Slip) की स्व-सत्यापित प्रति।
  • भू-लगान रसीद की स्व-सत्यापित प्रति।
  • नवीनतम अंतिम खतियान (CS या RS) की स्व-सत्यापित प्रति।
  • तय प्रारूप में स्व-घोषणा पत्र।
  • कागजों को साफ स्कैन करके PDF में तैयार रखें। धुंधली प्रति से आवेदन अटक सकता है।

🪜 ऑनलाइन आवेदन के चरण

  1. बिहार भूमि पोर्टल खोलें और वहाँ से परिमार्जन प्लस विकल्प चुनें।
  2. अपनी सुधार सेवा चुनें। यानी यह बताएँ कि नाम, खाता, खेसरा, रकबा या लगान में से किसमें गलती है।
  3. जिला, अंचल, मौजा (राजस्व गाँव) और जमाबंदी का विवरण भरें।
  4. गलत दर्ज जानकारी और सही जानकारी दोनों साफ-साफ लिखें।
  5. माँगे गए कागज अपलोड करें।
  6. आवेदन जमा करें और मिली हुई आवेदन संख्या को संभालकर रखें।

⏳ सुधार में कितना समय लगता है

  • विभाग की घोषणा की रिपोर्ट के अनुसार सुधार की समय-सीमा गलती की श्रेणी पर निर्भर करती है।
  • छोटी लिपिकीय गलती, जैसे रैयत या पिता के नाम की स्पेलिंग, अधिकतम 15 कार्य दिवस में सुधरती है।
  • तकनीकी विवरण, जैसे खाता संख्या, प्लॉट या सर्वे नंबर और लगान से जुड़ी गलती, 35 कार्य दिवस में निपटती है।
  • जिन मामलों में स्थल जाँच या विस्तृत प्रशासनिक पूछताछ जरूरी हो, उनमें 75 कार्य दिवस तक लग सकते हैं।
  • समय-सीमा आवेदन की श्रेणी और कागजों की पूर्णता पर निर्भर करती है। कागज अधूरे हों, तो प्रक्रिया रुक सकती है।

🔍 आवेदन की स्थिति कैसे देखें

  • परिमार्जन प्लस पोर्टल पर स्थिति देखने के विकल्प से आवेदन संख्या डालकर स्थिति देखें।
  • स्थिति की जानकारी SMS और ईमेल से भी मिलती है।
  • स्थिति लंबे समय तक न बदले, तो अपने अंचल कार्यालय में आवेदन संख्या के साथ संपर्क करें।

🔗 Important Links

काम सरकारी लिंक
बिहार भूमि पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in
परिमार्जन प्लस पोर्टल parimarjanplus.bihar.gov.in

🔗 इससे जुड़े जरूरी लेख

📘 जमाबंदी और खतियान ऑनलाइन कैसे देखें📘 दाखिल-खारिज कैसे करें📘 बिहार भूमि की सभी सेवाएँ एक जगह

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: परिमार्जन प्लस क्या है?
उत्तर: यह बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का पोर्टल है। इससे डिजिटल जमाबंदी में दर्ज गलतियों के सुधार का अनुरोध ऑनलाइन किया जाता है।

प्रश्न: क्या परिमार्जन प्लस से जमीन का मालिक बदला जा सकता है?
उत्तर: नहीं। मालिक बदलना दाखिल-खारिज से होता है। परिमार्जन सिर्फ दर्ज गलती को ठीक करता है।

प्रश्न: ऑनलाइन दाखिल-खारिज के बाद बनी जमाबंदी में खाता या खेसरा गलत हो, तो क्या करें?
उत्तर: ऐसा मामला परिमार्जन पोर्टल से नहीं सुधरता है। इसके लिए DCLR के सामने अपील करनी होती है।

प्रश्न: सुधार में कितना समय लगता है?
उत्तर: विभाग की घोषणा के अनुसार छोटी गलती में 15 कार्य दिवस, तकनीकी गलती में 35 कार्य दिवस और जटिल मामले में 75 कार्य दिवस तक लग सकते हैं।

प्रश्न: सुधार के लिए कौन से कागज चाहिए?
उत्तर: यह सुधार की श्रेणी पर निर्भर करता है। नाम के सुधार में आमतौर पर तय प्रारूप का आवेदन, दाखिल-खारिज आदेश, सुधार पर्ची, भू-लगान रसीद, अंतिम खतियान और स्व-घोषणा पत्र माँगे जाते हैं। हर सेवा की सही सूची पोर्टल पर ही देखें।

⚖️ ज़रूरी सूचना (Disclaimer)

Online Bihar एक निजी सूचना पोर्टल है, यह बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। इस लेख की जानकारी सरकारी पोर्टलों और सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर आम जानकारी के लिए दी गई है। पोर्टल के मेन्यू, बटन के नाम और प्रक्रिया समय-समय पर बदल सकती है, इसलिए अंतिम जानकारी के लिए ऊपर दिए गए आधिकारिक सरकारी पोर्टल से ही जाँच करें।

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Pankaj Kumar

Founder & Editor, Umesh TalksUmesh Pandit is a digital content creator and social worker who shares reliable updates on education, government jobs, and schemes. Since 2015, he has been helping students and youth stay informed through Umesh Talks.His mission is to deliver clear and timely information, especially for people in rural and small-town areas, so they can benefit from every opportunity. View All Posts

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