खेती करने वाला हर किसान जानता है कि मेहनत तो खेत में होती है, लेकिन कई बार मदद सरकारी दफ्तरों के चक्कर में अटक जाती है। बिहार सरकार ने इसी परेशानी को कम करने के लिए DBT कृषि पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के ज़रिये योजनाओं का पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में पहुँचता है, बीच में कोई नहीं होता।
इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि DBT कृषि पोर्टल क्या है, रजिस्ट्रेशन कैसे होता है, और बिहार में किसानों के लिए कौन-कौन सी योजनाएं चल रही हैं।
DBT कृषि पोर्टल क्या है?
DBT का मतलब है Direct Benefit Transfer, यानी लाभ सीधे खाते में। बिहार कृषि विभाग का यह पोर्टल एक ही जगह पर कई सेवाएं देता है। यहाँ से किसान योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं और अनुदान की राशि सीधे अपने बैंक खाते में पा सकते हैं।
आधिकारिक वेबसाइट: dbtagriculture.bihar.gov.in
पोर्टल पर आम तौर पर ये सुविधाएं मिलती हैं:
- किसान पंजीकरण
- कृषि इनपुट अनुदान, यानी प्राकृतिक आपदा में नुकसान की भरपाई
- कृषि यंत्रों पर सब्सिडी
- बीज और खाद से जुड़े अनुदान
- राज्य फसल सहायता योजना
- खेतों में ड्रोन से छिड़काव के लिए आवेदन
किसान रजिस्ट्रेशन क्यों ज़रूरी है?
बिहार में कृषि योजनाओं का लाभ लेना हो तो सबसे पहले पोर्टल पर पंजीकरण कराना होता है। बिना रजिस्ट्रेशन के आप किसी भी योजना में आवेदन नहीं कर पाएंगे।
रजिस्ट्रेशन के लिए ये कागज़ तैयार रखें:
- आधार कार्ड
- ज़मीन के कागज़ात, जैसे जमाबंदी या रसीद
- बैंक पासबुक, जिसमें खाता नंबर और IFSC साफ़ दिखे
- चालू मोबाइल नंबर
एक छोटी सलाह: आधार और बैंक खाते में नाम की स्पेलिंग एक जैसी होनी चाहिए। कई बार छोटी सी गलती की वजह से पैसा अटक जाता है
बिहार राज्य की प्रमुख कृषि योजनाएं
1. अनुदानित दर पर बीज वितरण
सरकार चाहती है कि गाँव-गाँव तक नई और बेहतर किस्म के बीज पहुँचें। इसलिए धान और गेहूँ के लिए 10 साल से कम पुरानी किस्मों के बीज पर अनुदान दिया जाता है। दलहन और तेलहन के लिए यह सीमा 15 साल से कम की है। पुरानी किस्में कम उपज देती हैं, इसलिए नई किस्म पर ज़ोर दिया गया है।
2. बीज ग्राम योजना
यह योजना साल 2007-08 से चल रही है। इसमें किसानों को धान और गेहूँ का आधार या प्रमाणित बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर मिलता है। दलहन और तेलहन फसलों के लिए यह अनुदान 60 प्रतिशत है।
इसमें खास बात यह है कि किसानों को बीज उत्पादन की ट्रेनिंग भी दी जाती है। यह ट्रेनिंग तीन चरणों में होती है: बुआई से पहले, फसल के बीच में और कटाई से पहले। एक बीज ग्राम में ज़्यादा से ज़्यादा 100 किसान चुने जाते हैं, और हर चुने हुए किसान को एक एकड़ के लिए बीज मिलता है।
3. एकीकृत बीज ग्राम योजना
यह योजना गया, नालंदा, बक्सर, रोहतास, कैमूर, भोजपुर, औरंगाबाद, कटिहार और पूर्णिया जिलों के चुने हुए गाँवों में चलती है। यहाँ दलहन-तेलहन के बीज 60 प्रतिशत और बाकी फसलों के बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर दिए जाते हैं। चुने गए गाँव को पाँच साल तक मदद मिलती है।
4. धान की मिनीकिट योजना
इस योजना में चुने हुए किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान पर बीज का छोटा पैकेट दिया जाता है। इसका मकसद यह देखना है कि कौन सी नई किस्म किस इलाके में अच्छी चलती है। बाढ़ और सुखाड़ झेलने वाली किस्मों जैसे स्वर्ण सब-1 के 6 किलो के पैकेट आधे एकड़ के लिए दिए जाते हैं।
5. कृषि यांत्रिकीकरण योजना
आज के समय में मशीन के बिना खेती महंगी और थकाने वाली हो गई है। इस योजना में 69 तरह के कृषि यंत्रों पर अनुदान मिलता है। इनमें ट्रैक्टर, कम्बाइन हार्वेस्टर, पावर टिलर, पम्पसेट, जीरो टिलेज मशीन और रोटावेटर जैसे यंत्र शामिल हैं।
अच्छी बात यह है कि आवेदन से लेकर यंत्र मिलने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। साथ ही, किसान मेले के बाहर से खरीदे गए यंत्रों पर भी अनुदान देने का प्रावधान है।
कस्टम हायरिंग सेंटर और कृषि यंत्र बैंक: अगर कोई समूह या उद्यमी महंगे यंत्र किराये पर देने का काम करना चाहे, तो उसे मदद मिलती है। 10, 25 और 40 लाख रुपये की लागत वाले कृषि यंत्र बैंक पर 40 प्रतिशत अनुदान है। गाँवों में 10 लाख तक के यंत्र बैंक पर आवेदक समूह को 80 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है।
6. डीजल अनुदान योजना
जब बारिश कम होती है, तो सिंचाई का खर्च किसान की जेब पर भारी पड़ता है। ऐसे समय में डीजल अनुदान बड़ी राहत देता है।
- खरीफ फसलों में: 30 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 300 रुपये प्रति एकड़ प्रति सिंचाई। अधिकतम 900 रुपये प्रति एकड़।
- रबी फसलों में: गेहूँ में तीन सिंचाई और बाकी रबी फसलों में दो सिंचाई तक, 300 रुपये प्रति एकड़ की दर से अधिकतम 900 रुपये प्रति एकड़।
7. जीरो टिलेज से गेहूँ की बुआई
धान की कटाई के बाद खेत की जुताई किए बिना सीधे गेहूँ बोने की तकनीक को जीरो टिलेज कहते हैं। इसके प्रदर्शन के लिए 2,960 रुपये प्रति एकड़ अनुदान की व्यवस्था है। इससे बुआई में 20 से 25 दिन की बचत होती है और जुताई का खर्च भी बचता है।
8. जैविक खेती प्रोत्साहन योजना
सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक कॉरिडोर बना रही है। यह खास तौर पर गंगा किनारे के गाँवों में है। इसके तहत वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, गोबर गैस प्लांट, जैव उर्वरक और हरी खाद पर अलग-अलग अनुदान मिलता है। उदाहरण के लिए, 75 घन फीट की वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम 3,000 रुपये प्रति यूनिट मिलता है।
9. दियारा विकास योजना
गंगा और दूसरी नदियों के किनारे दियारा इलाकों में खेती की चुनौतियाँ अलग होती हैं। राज्य के 25 जिलों में यह योजना चलती है। इसमें कद्दू, नेनुआ, करेला, मेलन और भिंडी के हाइब्रिड बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान (अधिकतम 8,000 रुपये प्रति हेक्टेयर) मिलता है। मटर के बीज पर अधिकतम 3,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचाई के लिए पीवीसी पाइप बोरिंग पर अधिकतम 7,500 रुपये तक अनुदान का प्रावधान है।
10. धान की कम्युनिटी नर्सरी
एक एकड़ में नर्सरी लगाने वाले किसान को 6,500 रुपये की सहायता दी जाती है। अगर किसान बिचड़ा खरीदकर रोपनी करता है, तो एक एकड़ के लिए 1,000 रुपये अनुदान मिलता है।
11. ई-किसान भवन
किसानों को एक ही छत के नीचे कृषि इनपुट और तकनीकी सेवाएं मिल सकें, इसलिए राज्य के सभी 534 प्रखंडों में ई-किसान भवन बनाए जा रहे हैं। सरकारी जानकारी के मुताबिक 362 प्रखंडों में काम पूरा हो चुका था और बाकी 172 में चल रहा था।
केंद्र सरकार की योजनाएं जो बिहार में लागू हैं
राज्य की योजनाओं के साथ केंद्र की कई योजनाएं भी बिहार के किसानों तक पहुँचती हैं:
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन: चावल, गेहूँ, दलहन और मक्का का उत्पादन बढ़ाने के लिए।
- राष्ट्रीय तेलहन एवं ऑयलपाम मिशन: सरसों, मूँगफली और सूरजमुखी जैसी फसलों की उपज बढ़ाने के लिए।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: "हर खेत को पानी" और ड्रिप-स्प्रिंकलर जैसी पानी बचाने वाली तकनीक के लिए।
- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना: खेती के हर पहलू के विकास के लिए, जिसमें केंद्र और राज्य 60:40 के अनुपात में खर्च उठाते हैं।
- मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड योजना: खेत की मिट्टी की जाँच करके यह बताना कि कौन सा पोषक तत्व कितना डालना है।
- परम्परागत कृषि विकास योजना: जैविक खेती के लिए 50 या ज़्यादा किसानों का समूह बनाकर, तीन साल तक प्रति एकड़ 20,000 रुपये तक की सहायता।
आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)
- dbtagriculture.bihar.gov.in खोलें।
- किसान पंजीकरण का विकल्प चुनें और आधार, ज़मीन व बैंक की जानकारी भरें।
- रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करें।
- जिस योजना का लाभ लेना है, उसे चुनकर आवेदन भरें।
- ज़रूरी कागज़ अपलोड करें।
- आवेदन नंबर संभालकर रखें और स्थिति समय-समय पर देखते रहें।
- मंज़ूरी के बाद अनुदान आपके बैंक खाते में आ जाएगा।
अगर ऑनलाइन करने में दिक्कत आए, तो अपने प्रखंड के कृषि पदाधिकारी से मिलें या किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 18001801551 पर बात करें।
आवेदन करते समय ये गलतियाँ न करें
- नाम का मेल न होना: आधार, बैंक खाता और ज़मीन के कागज़ में नाम अलग-अलग लिखा हो, तो आवेदन अटक सकता है।
- बैंक खाता बंद या निष्क्रिय होना: अनुदान की राशि ऐसे खाते में नहीं पहुँचती।
- आख़िरी तारीख़ का इंतज़ार: कई योजनाओं में सीमित लक्ष्य होता है, इसलिए जल्दी आवेदन करना बेहतर है।
- गलत जगह पैसे देना: पोर्टल पर आवेदन मुफ़्त होता है। जो भी बिचौलिया पैसे माँगे, उससे सावधान रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: क्या DBT कृषि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन मुफ़्त है?
उत्तर: सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं लगना चाहिए। किसी के पैसे माँगने पर कृषि पदाधिकारी से शिकायत करें।
प्रश्न: अगर मेरे पास अपनी ज़मीन नहीं है, तो क्या मुझे लाभ मिल सकता है?
उत्तर: यह योजना पर निर्भर करता है। कई योजनाओं में ज़मीन के कागज़ माँगे जाते हैं, इसलिए आवेदन से पहले योजना की शर्तें पढ़ लें या कृषि पदाधिकारी से पूछें।
प्रश्न: सब्सिडी का पैसा कहाँ आता है?
उत्तर: सीधे किसान के बैंक खाते में, जो पंजीकरण के समय दिया गया हो।
प्रश्न: फसल को नुकसान हो जाए तो क्या करें?
उत्तर: ओलावृष्टि, आँधी या बेमौसम बारिश जैसी आपदा में कृषि इनपुट अनुदान के लिए पोर्टल पर आवेदन किया जाता है। राज्य फसल सहायता योजना में भी नुकसान की स्थिति में सहायता का प्रावधान है।
प्रश्न: यंत्र पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
उत्तर: यह यंत्र के प्रकार और श्रेणी पर निर्भर करती है। सही प्रतिशत और राशि पोर्टल पर यंत्र चुनते समय दिख जाती है।
निष्कर्ष
बिहार सरकार की कृषि योजनाएं किसानों की लागत घटाने और आमदनी बढ़ाने के लिए बनी हैं। बीज, मशीन, सिंचाई और जैविक खेती, हर चीज़ के लिए कोई न कोई योजना मौजूद है। ज़रूरत सिर्फ़ इतनी है कि आप समय पर रजिस्ट्रेशन कराएं, कागज़ पूरे रखें और सही जानकारी के साथ आवेदन करें।
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