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बिहार में वंशावली प्रमाण पत्र कैसे बनता है (Bansawali Kaise Banta Hai): फॉर्म, जरूरी कागज, पंचायत प्रक्रिया और फीस
Gov Scheme October 23, 2026 1 min read 7 views Updated: October 25, 2026

बिहार में वंशावली प्रमाण पत्र कैसे बनता है (Bansawali Kaise Banta Hai): फॉर्म, जरूरी कागज, पंचायत प्रक्रिया और फीस

बिहार में वंशावली प्रमाण पत्र (Bansawali) कैसे बनता है और इसके लिए कौन-कौन से कागज लगते हैं? वंशावली आपके परिवार की पीढ़ियों का रिकॉर्ड होता है, जिसमें दादा, परदादा, पिता और वर्तमान वारिसों का क्रम दर्ज रहता है। बिहार में जमीन के पुराने रिकॉर्ड अक्सर पूर्वजों के नाम पर होते हैं, इसलिए पैतृक जमीन के बंटवारे, उत्तराधिकार, दाखिल-खारिज और चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण में वंशावली की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। यह प्रमाण पत्र ऑनलाइन नहीं बनता, बल्कि ऑफलाइन प्रक्रिया से बनता है — ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत स्तर पर ग्राम कचहरी के सरपंच द्वारा और शहरी क्षेत्र में अंचलाधिकारी द्वारा निर्गत किया जाता है। पंचायत से बनवाने पर सरकारी फीस सामान्यतः नहीं लगती। इस लेख में वंशावली का फॉर्म कहाँ मिलेगा, कौन से कागज लगेंगे, गवाहों और हस्ताक्षर की प्रक्रिया क्या है तथा शिविर से जुड़ी ताजा जानकारी आसान भाषा में दी गई है।

📘 वंशावली प्रमाण पत्र: एक नज़र में (Overview)

 
बात जानकारी
दस्तावेज़ का नाम वंशावली प्रमाण पत्र (Bansawali / Vanshavali / Family Tree Certificate)
यह क्या बताता है परिवार की पीढ़ियों का क्रम — पूर्वजों से लेकर वर्तमान वारिसों तक का संबंध
सबसे ज्यादा काम पैतृक जमीन का बंटवारा, उत्तराधिकार, दाखिल-खारिज (Mutation), विशेष भूमि सर्वेक्षण में दावा
संबंधित विभाग राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार; ग्रामीण क्षेत्र की व्यवस्था पंचायती राज विभाग के परिपत्र के अनुसार
गाँव में कौन जारी करता है ग्राम कचहरी के सरपंच (सत्यापन और हस्ताक्षर की प्रक्रिया पंचायत स्तर पर होती है)
शहर में कौन जारी करता है संबंधित अंचल के अंचलाधिकारी (दिसंबर 2025 के विभागीय आदेश के अनुसार)
आवेदन का तरीका ऑफलाइन — वार्ड सदस्य / पंचायत से फॉर्म लेकर भरना होता है
सरकारी फीस पंचायत स्तर पर सामान्यतः निःशुल्क; शपथ पत्र या फोटोकॉपी का मामूली खर्च अलग से हो सकता है
कितना समय लगता है सामान्यतः कुछ दिनों से लगभग 1 से 2 सप्ताह, जाँच और हस्ताक्षर की प्रक्रिया पर निर्भर

🧭 Table of Contents: इस लेख में क्या-क्या है

 
📑 Table of Contents (क्लिक करके खोलें)
  1. वंशावली क्या है और कहाँ काम आता है
  2. ताजा अपडेट: पंचायत शिविर और शहरी क्षेत्रों की नई व्यवस्था
  3. कौन बनवा सकता है (Eligibility)
  4. Required Documents: कौन-कौन से कागज चाहिए
  5. Step-by-Step: वंशावली बनवाने की पूरी प्रक्रिया
  6. फॉर्म भरते समय ध्यान देने वाली बातें
  7. कितना समय और कितनी फीस लगेगी
  8. आम दिक्कतें और उनके उपाय
  9. Important Links
  10. Bansawali FAQs
  11. जरूरी सूचना (Disclaimer)

🌳 वंशावली क्या है और कहाँ काम आता है

 

वंशावली एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसमें किसी परिवार का वंश-क्रम लिखा होता है — किसके पिता कौन थे, दादा और परदादा कौन थे, और आज उस परिवार के वारिस कौन-कौन हैं। इसे अंग्रेजी में Family Tree या Genealogy कहा जाता है। बिहार में खतियान और जमाबंदी जैसे जमीन के रिकॉर्ड अक्सर कई पीढ़ी पुराने नामों पर बने हैं, इसलिए आज के वारिसों को पूर्वजों से अपना संबंध साबित करने के लिए वंशावली की जरूरत पड़ती है।

वंशावली आमतौर पर इन कामों में लगती है:

  • पैतृक जमीन का बंटवारा: भाइयों और वारिसों के बीच हिस्सा तय करने और बंटवारा दर्ज कराने में।
  • दाखिल-खारिज (Mutation): पूर्वज के देहांत के बाद जमाबंदी अपने नाम कराने के आवेदन में।
  • विशेष भूमि सर्वेक्षण: चल रहे सर्वेक्षण और बंदोबस्त में जमीन पर अपना दावा (स्वामित्व) पेश करते समय, जहाँ वंशावली की जानकारी प्रपत्र-3(1) में दी जाती है।
  • उत्तराधिकार से जुड़े काम: बैंक, बीमा या अन्य कानूनी कामों में जहाँ वारिस होने का सबूत माँगा जाता है।
  • कृषि और सरकारी योजनाएँ: कई योजनाओं में जमीन के स्वामित्व या परिवारिक संबंध का सबूत माँगने पर।

ध्यान दें: जमीन से जुड़े कामों में वंशावली के साथ अक्सर आय, निवास और जाति प्रमाण पत्र भी माँगे जाते हैं। अगर आपके पास ये नहीं हैं, तो हमारे ये लेख देखकर पहले इन्हें बनवा लें: 💰 बिहार आय प्रमाण पत्र ऑनलाइन आवेदन, 🏠 बिहार निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन आवेदन और 📄 RTPS बिहार जाति प्रमाण पत्र ऑनलाइन आवेदन। वंशावली फॉर्म का प्रारूप (Format) देखने के लिए हमारा यह लेख भी पढ़ें: 📝 Bansawali Form: प्रारूप और भरने का तरीका।

📰 ताजा अपडेट: पंचायत शिविर और शहरी क्षेत्रों की नई व्यवस्था

 

पहले वंशावली बनवाने के लिए लोगों को अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब ग्रामीण क्षेत्रों में यह काम पंचायत स्तर पर ही होने लगा है। समाचारों के अनुसार कई जिलों में पंचायत स्तर पर वंशावली के लिए शिविर लगाए जाते हैं, जिनमें आमतौर पर सप्ताह के तय दिनों में फॉर्म जमा करने, जाँच और सत्यापन का काम एक ही जगह निपटाया जाता है। आपके गाँव में शिविर कब और किन दिनों में लगता है, इसकी पक्की जानकारी अपने वार्ड सदस्य या पंचायत सचिव से लें, क्योंकि हर जगह की व्यवस्था थोड़ी अलग हो सकती है।

शहरी पाठकों के लिए एक जरूरी जानकारी यह है कि दिसंबर 2025 में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आदेश जारी कर नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने के लिए अंचलाधिकारी को सक्षम प्राधिकार बनाया है। यानी शहर में रहने वाले लोग अब अपने संबंधित अंचल के अंचलाधिकारी के यहाँ से वंशावली बनवा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वंशावली पंचायती राज विभाग के परिपत्र के तहत सरपंच द्वारा निर्गत की जाती रही है।

राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण और बंदोबस्त में भी वंशावली एक महत्वपूर्ण कागज है। सर्वेक्षण के दौरान रैयतों को अपनी वंशावली की जानकारी प्रपत्र-3(1) में देनी होती है और ग्राम सभा में इसका सत्यापन भी किया जाता है, ताकि गलत जानकारी दर्ज न हो। सर्वे से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए भूमि अभिलेख और सर्वेक्षण निदेशालय का पोर्टल dlrs.bihar.gov.in देखें (लिंक नीचे Important Links में दिया गया है)।

✅ कौन बनवा सकता है (Eligibility)

 

वंशावली बनवाने के लिए कोई लंबी-चौड़ी शर्त नहीं है। आमतौर पर ये लोग वंशावली बनवा सकते हैं:

  • बिहार का कोई भी नागरिक, जिसके परिवार की जमीन या संपत्ति का रिकॉर्ड पूर्वजों (दादा, परदादा आदि) के नाम पर है।
  • परिवार के वारिस — बेटा, बेटी, पति या पत्नी — जिन्हें उत्तराधिकार या वारिस होने का सबूत चाहिए।
  • विशेष भूमि सर्वेक्षण में अपनी जमीन का दावा पेश करने वाले रैयत।
  • जिन्हें बंटवारे, दाखिल-खारिज या किसी कानूनी काम के लिए परिवार का वंश-क्रम साबित करना हो।

आमतौर पर वंशावली उसी पंचायत या क्षेत्र से बनती है जहाँ परिवार का मूल निवास है या जहाँ की जमीन का मामला है। इसलिए अपने ही गाँव की पंचायत में आवेदन करें, ताकि वहाँ के लोग और पंचायत कर्मी आपके परिवार को पहचानकर सत्यापन कर सकें।

📎 Required Documents: कौन-कौन से कागज चाहिए

 

फॉर्म भरने से पहले ये कागज तैयार रखें। पंचायत स्तर पर आमतौर पर इन्हीं की फोटोकॉपी माँगी जाती है:

कागज़ कहाँ लगेगा
आवेदक का आधार कार्ड आवेदक की पहचान के लिए
पिता या पति का आधार कार्ड आवेदक का संबंध साबित करने के लिए
दादा / परदादा का मृत्यु प्रमाण पत्र यदि उनका देहांत हो चुका हो। जीवित होने पर उनका आधार कार्ड लगेगा
5 गवाहों के आधार कार्ड गवाही के लिए — सामान्यतः गाँव के ही गवाह लिए जाते हैं
जमीन से जुड़े कागज (खतियान की नकल, जमाबंदी विवरण, लगान रसीद) खासकर जमीन बंटवारे या सर्वे से जुड़े मामले में
चालू मोबाइल नंबर सूचना और संपर्क के लिए

इसके साथ ही फॉर्म पर मुखिया, वार्ड सदस्य, आंगनबाड़ी सेविका और चौकीदार के हस्ताक्षर करवाने होते हैं। ये हस्ताक्षर इस बात की स्थानीय पुष्टि करते हैं कि फॉर्म में दी गई पारिवारिक जानकारी सही है। हस्ताक्षर करवाने में समय लग सकता है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले इन सभी से मिलकर बात कर लें। परिवार के सदस्यों के नाम मिलान करने में राशन कार्ड भी काम आता है — अगर आपके राशन कार्ड में नाम अधूरे हैं, तो हमारा लेख 🍚 बिहार राशन कार्ड ऑनलाइन आवेदन: नया राशन कार्ड कैसे बनाएं पढ़ें।

🪜 Step-by-Step: वंशावली बनवाने की पूरी प्रक्रिया

 

गाँव में वंशावली बनवाने की सामान्य प्रक्रिया इस तरह रहती है:

चरण 1: वार्ड सदस्य या पंचायत से फॉर्म लें

सबसे पहले अपने क्षेत्र के वार्ड सदस्य से मिलें। वंशावली का आवेदन पत्र सामान्यतः वहीं से मिलता है। अगर वार्ड सदस्य के पास फॉर्म न हो, तो पंचायत भवन या ग्राम कचहरी से भी फॉर्म लिया जा सकता है। शिविर लग रहा हो तो फॉर्म शिविर में ही मिल जाता है।

चरण 2: परिवार की वंश-सूची तैयार करें

फॉर्म के साथ लगने वाली वंश-सूची में अपने परिवार का क्रम लिखें — सबसे पुराने पूर्वज से शुरू करके वर्तमान पीढ़ी तक। हर सदस्य का नाम, उसके पिता का नाम, संबंध और वह जीवित है या नहीं, यह जानकारी साफ-साफ लिखें। यह सूची ही आपके प्रमाण पत्र की नींव होती है, इसलिए इसे घर के बड़े-बुजुर्गों से पूछकर तैयार करें।

चरण 3: फॉर्म ध्यान से भरें और कागज लगाएं

आवेदक का नाम, पिता या पति का नाम, गाँव, पंचायत, प्रखंड, अंचल और जिला सही-सही भरें। ऊपर बताए गए कागजों की फोटोकॉपी फॉर्म के साथ लगाएं। नाम की स्पेलिंग हर जगह आधार कार्ड से मिलाकर ही लिखें।

चरण 4: गवाहों और स्थानीय लोगों के हस्ताक्षर करवाएं

सामान्यतः फॉर्म पर 5 गवाहों के हस्ताक्षर के साथ मुखिया, वार्ड सदस्य, आंगनबाड़ी सेविका और चौकीदार के हस्ताक्षर और मोहर लगती है। ये सभी आपके गाँव के ही लोग होते हैं और आपके परिवार को जानते हैं, इसलिए हस्ताक्षर करवाना कठिन नहीं होता — बस सभी को एक साथ इकट्ठा करने में समय लग सकता है।

चरण 5: फॉर्म जमा करें और जाँच करवाएं

भरा हुआ फॉर्म वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव या ग्राम कचहरी में जमा करें। जाँच के दौरान पंचायत स्तर पर आपकी दी जानकारी का मिलान किया जाता है। कुछ जगहों पर ग्राम सभा में भी वंशावली का सत्यापन किया जाता है, ताकि किसी को आपत्ति हो तो वहीं उसका निराकरण हो सके।

चरण 6: सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र प्राप्त करें

सब कुछ सही पाए जाने पर सरपंच (ग्राम कचहरी) के हस्ताक्षर और मोहर के साथ वंशावली प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। प्रमाण पत्र मिलते ही उसी समय सभी नाम और पीढ़ियों की जानकारी ध्यान से जाँच लें — गलती दिखे तो तुरंत वहीं बताएं, बाद में सुधार में ज्यादा समय लगता है।

शहरी क्षेत्र के पाठक ध्यान दें: दिसंबर 2025 के विभागीय आदेश के बाद नगर निकाय क्षेत्रों में वंशावली अंचलाधिकारी द्वारा निर्गत की जाती है। इसलिए शहर में रहने वाले पाठक अपने अंचल कार्यालय जाएं, वहाँ की फॉर्म और प्रक्रिया की जानकारी कार्यालय से ही मिलेगी।

✍️ फॉर्म भरते समय ध्यान देने वाली बातें

 

नाम की स्पेलिंग हर जगह एक रखें

सबसे आम गलती यही होती है — आधार में नाम कुछ और, खतियान में कुछ और। जिस कागज में नाम गलत है, उसे पहले सुधरवाने की कोशिश करें, और फॉर्म में वही नाम लिखें जो आपके आधार और बैंक खाते में है। नाम के फर्क की वजह से आगे दाखिल-खारिज या सर्वे का दावा अटक सकता है।

सभी वारिसों के नाम शामिल करें

वंश-सूची में परिवार के सभी वारिसों के नाम लिखें — बेटे हों या बेटियाँ, किसी का नाम न छोड़ें। किसी वारिस का नाम छूट जाने से बाद में बंटवारे में विवाद खड़ा हो सकता है और वंशावली दोबारा बनवानी पड़ सकती है।

मृत्यु की जानकारी सही लिखें

जिन पूर्वजों का देहांत हो चुका है, उनकी मृत्यु का वर्ष या तिथि जहाँ तक याद हो, वही लिखें। मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध हो तो उसकी प्रति जरूर लगाएं, इससे सत्यापन आसान हो जाता है।

याद रखें: वंशावली एक कानूनी महत्व का दस्तावेज़ है। इसमें जानबूझकर गलत जानकारी देना ठीक नहीं है — गलत जानकारी पकड़े जाने पर प्रमाण पत्र रद्द हो सकता है और सर्वे या बंटवारे में आपका दावा कमजोर पड़ सकता है।

⏳ कितना समय और कितनी फीस लगेगी

 
बात जानकारी
पंचायत से बनवाने की सरकारी फीस सामान्यतः निःशुल्क — पंचायत स्तर पर वंशावली बनवाने का कोई सरकारी शुल्क नहीं लिया जाता
शपथ पत्र (Affidavit) अगर आपके मामले में शपथ पत्र माँगा जाए, तो नोटरी या कोर्ट का शुल्क अलग से लगेगा, जो स्थानीय दर पर निर्भर करता है
फोटोकॉपी और अन्य छोटे खर्च कागजों की फोटोकॉपी जैसे मामूली खर्च अपने पास से होते हैं
बनने का समय सामान्यतः कुछ दिनों से 1 से 2 सप्ताह। शिविर लगा हो तो जाँच और सत्यापन उसी दौरान तेज़ी से हो जाता है

सावधान रहें: पंचायत से वंशावली बनवाना निःशुल्क प्रक्रिया है। अगर कोई व्यक्ति इसके नाम पर बड़ी रकम माँगे, तो पैसे न दें और पहले पंचायत सचिव या ग्राम कचहरी से सही जानकारी लें।

⚠️ आम दिक्कतें और उनके उपाय

 

दिक्कतें क्यों आती हैं

  • नाम की स्पेलिंग में फर्क: आधार, खतियान और पुराने कागजों में एक ही व्यक्ति के नाम की स्पेलिंग अलग-अलग होना।
  • वारिस का नाम छूटना: वंश-सूची बनाते समय किसी सदस्य का नाम रह जाना।
  • हस्ताक्षर अधूरे रहना: गवाहों या स्थानीय पदाधिकारियों में से किसी के हस्ताक्षर न हो पाना।
  • मृत्यु प्रमाण पत्र न होना: पूर्वज का देहांत बहुत पहले हुआ हो और प्रमाण पत्र कभी बना ही न हो।
  • पुराने रिकॉर्ड से मेल न खाना: वंशावली की जानकारी का खतियान या जमाबंदी से मेल न खाना।

अब क्या करें?

दिक्कत आए तो सबसे पहले अपने पंचायत सचिव या ग्राम कचहरी से मिलकर कारण जानें और वही कमी पूरी करें। मृत्यु प्रमाण पत्र न हो तो परिवार के सदस्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर स्थानीय स्तर पर जो व्यवस्था हो, वह पंचायत से पूछकर अपनाएं। अगर सर्वेक्षण के दौरान बनी वंशावली में गलती रह गई हो, तो सामान्यतः सर्वे शिविर कार्यालय में प्रपत्र-3 के जरिए सुधार का आवेदन दिया जा सकता है। जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड — जैसे जमाबंदी और खतियान — देखने के लिए सरकारी पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in और bhuabhilekh.bihar.gov.in का उपयोग करें, ताकि फॉर्म भरने से पहले अपने रिकॉर्ड खुद जाँच सकें।

 
काम सरकारी लिंक
विशेष भूमि सर्वेक्षण और वंशावली (प्रपत्र-3) की जानकारी 🌐 DLRS Survey Portal
जमाबंदी और जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन देखें 🏛️ Bihar Bhumi Portal
खतियान की नकल देखें 📜 Bhu Abhilekh Portal
आय, निवास और जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन 📄 RTPS Bihar Portal

❓ Bansawali (वंशावली) FAQs

 
क्या वंशावली प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनता है?
वंशावली बनवाने की मुख्य प्रक्रिया ऑफलाइन है — पंचायत या ग्राम कचहरी के जरिए। हाँ, अगर आपके क्षेत्र में विशेष भूमि सर्वेक्षण चल रहा है, तो सर्वे से जुड़ी वंशावली की जानकारी dlrs.bihar.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन भी जमा की जा सकती है। सामान्य काम के लिए वंशावली बनवानी हो, तो अपने गाँव की पंचायत में ही जाएं।
वंशावली बनवाने की फीस कितनी है?
पंचायत स्तर पर वंशावली बनवाने की सरकारी फीस सामान्यतः नहीं लगती, यानी यह निःशुल्क है। हाँ, अगर आपके मामले में शपथ पत्र (Affidavit) माँगा जाता है, तो उसका नोटरी शुल्क अलग से देना पड़ सकता है। किसी व्यक्ति को वंशावली के नाम पर बड़ी रकम बिल्कुल न दें।
गाँव में वंशावली कौन जारी करता है?
ग्रामीण क्षेत्रों में वंशावली पंचायती राज विभाग के परिपत्र के तहत ग्राम कचहरी के सरपंच द्वारा निर्गत की जाती है। प्रक्रिया में वार्ड सदस्य से फॉर्म मिलता है और मुखिया, वार्ड सदस्य, आंगनबाड़ी सेविका तथा चौकीदार के हस्ताक्षर से स्थानीय सत्यापन होता है।
मैं शहर में रहता हूँ, मेरी वंशावली कहाँ बनेगी?
दिसंबर 2025 में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आदेश जारी कर नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने के लिए अंचलाधिकारी को सक्षम प्राधिकार बनाया है। इसलिए शहरी क्षेत्र के निवासी अपने संबंधित अंचल के अंचलाधिकारी कार्यालय से वंशावली बनवा सकते हैं।
वंशावली बनने में कितना समय लगता है?
सामान्यतः कुछ दिनों से 1 से 2 सप्ताह का समय लगता है। असली समय गवाहों और स्थानीय पदाधिकारियों के हस्ताक्षर तथा जाँच पर निर्भर करता है। पंचायत में शिविर लगा हो तो काम अपेक्षाकृत जल्दी हो जाता है।
वंशावली के लिए कितने गवाह चाहिए?
सामान्यतः 5 गवाहों के आधार कार्ड और हस्ताक्षर लिए जाते हैं। गवाह आमतौर पर उसी गाँव के लोग होते हैं जो आपके परिवार को जानते हों। अपनी पंचायत में एक बार पक्का कर लें कि वहाँ कितने गवाहों की व्यवस्था है।
वंशावली में नाम की गलती हो जाए तो क्या करें?
प्रमाण पत्र मिलते ही सभी नाम जाँच लें। गलती दिखे तो तुरंत पंचायत सचिव या ग्राम कचहरी से मिलकर सुधार करवाएं। अगर गलती सर्वेक्षण के दौरान दर्ज वंशावली में हुई हो, तो सामान्यतः सर्वे शिविर कार्यालय में प्रपत्र-3 के जरिए सुधार का आवेदन दिया जा सकता है।

⚖️ ज़रूरी सूचना (Disclaimer)

 
Online Bihar एक निजी सूचना पोर्टल है, यह बिहार सरकार या किसी सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। इस लेख की जानकारी सरकारी विभागों की घोषणाओं, परिपत्रों और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर आम जानकारी के लिए दी गई है। वंशावली बनवाने की प्रक्रिया और कागजों की सूची क्षेत्र के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन से पहले अपनी पंचायत, ग्राम कचहरी या अंचल कार्यालय से अंतिम जानकारी जरूर जांच लें। वंशावली बनवाने के नाम पर किसी व्यक्ति को पैसे न दें।

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